Excess of Democracy leads to Chaos

While going through a crossway, 2 bikers violated their lane and occupied my lane thereby blocking my road to go just to spare few seconds. Seeing them well groomed and looking educated, I stopped beside them, lowered my car window and did say, It’s good to be Smart but Bad to be Oversmart. They changed... Continue Reading →

Trikaal Darsh

त्रिकाल दर्श- प्रकृति के तीन गुणसतोगुण रज व तम से तो जातक करे राजकर्म अकर्म विकर्म से मस्तिष्क की अवस्थाचेतन अचेतन या रहे अवचेतनविस्मृत रहते हम सदासंसार क्या शरीर व अंतःकरण चाह ऐसी कि होने कोतन मन से पुष्ट तुष्ट रुष्टभ्रम की माया कुछ ऐसीसंशय में द्रष्टि द्रश्य द्रष्टा जकड़े शरीर की लीलासंतुलन का वात... Continue Reading →

Self Policing : Way to transform

This article is for those few who don’t believe in any law enforcing agency like Police or don’t believe in self policing either. Educated, but not civilized! We as nation loving Indians on roads, come across with people driving vehicles with all possible indisciplined ways & means of driving. This mal behaviour of driving. We... Continue Reading →

The Science Of Absorption (670)

While walking in the morning, one of my Namaskar-friend (A passerby with no friendship as such but we know because of seeing each other every morning with only Namaskar Communication) asked me, Doctor Sb, I am running low with vitamin B12. Please suggest some indigenous and Deshi means to increase the level of B12. I... Continue Reading →

Poem : अकेले की यात्रा सही

जितनी देर-दूर दुनिया देखी,छल से छलकती तो प्रेम से भरी.किस पथ चलें का असमंजस,या निपट अकेले की यात्रा सही. जीव जंतु देखे-पाले सदा,रिश्ते-मित्र ऊँचे-नीचे कहीं.अमृत कभी तो रक्त से रिसते,या अब अकेले की यात्रा सही. वायु पहाड़ नदी जंगल निर्मल,मानव स्वार्थी और मटमैले कहीं,तू अधम का अभिमान अजबया अपनी अकेले की यात्रा सही. सेवा भाव... Continue Reading →

Movie Review: Micheal

वैश्विक रूप से प्रसिद्ध लोगों के अंदरूनी जीवन में झांकने की आम लोगों की सदैव इच्छा रखती है और जब बात पॉप संगीत के निर्विवाद विश्व विजेता माइकल जैक्सन जैसे किसी गुप्त, रहस्यपूर्ण और रहस्यमयी व्यक्तित्व की हो तो प्रचलित अफवाहों का एक ऐसो बवंडर उठ खड़ा होता है कि सच्चाई का पता ही नहीं... Continue Reading →

Movie Review: Bandar

This movie Bandar is a dreadful experience to watch as it exposes loopholes in social relationships and stringent judicial system. One of the most misunderstood human thing is interpersonal relationship. And if it is related to sexual exploitation or relationship with consent or without consent, then it May expose a person into such a state... Continue Reading →

Rakhi (666)

क्या अजब ग़ज़ब त्योहार हैधागे की गठान बांधने कोकलाई पर धागा बने साक्षीबहन का बंधन एक भाई को सावन मास की पूर्णिमा कोरक्षा का वार्षिक तत्व आबद्धएक बहन के लिए उसका भाईसंबंधों की गरिमा को प्रतिबद्ध कोई रस्म मात्र नहीं है यहरक्षा-सूत्र हेतु बहन दूर से आईथाली में टीका, रोली-अक्षतदिया-बाती, कुछ मीठा सजाई और रेशम... Continue Reading →

Movie Review : The Last Samurai

इतिहास के दृष्टांतों और पृष्ठभूमि को देखा जाए तो मानव इतिहास के वैश्विक पटल पर युद्ध की राजनीति और राजनीति का युद्ध यदा-कदा नहीं निरंतर होने वाली घटना के रूप में देखा जा सकता है. न जाने क्यों ऐसा प्रतीत होता है कि मानव के गुणसूत्रों में झगड़े का तत्व उपस्थित है और वह मानव... Continue Reading →

समीक्षा: Facing El chapo

ज़िंदगी अनिश्चितताओं, डर, आशंका और जानलेवा मुठभेड़ों से भरी है, और अगर आप एक ड्रग माफिया देश मेक्सिको में पुलिस वाले हैं और अचानक माफिया के सुप्रीम लीडर एल चोपो को गिरफ्तार कर लेते हैं तो प्राण भय , परिवार भय का उच्च स्तर हावी हो जाता है. यह माफ़िया डॉन इतना डरावना है कि... Continue Reading →

MR: Facing El Chapo

Movie Review: Movie based on real incidence Life is full of uncertainties, fear, apprehension, and deadly encounters, One time on the other. And if you are a police man in a drug Mafia country Mexico and suddenly arrest the mafia supreme leader El Chapo. This Don is so fearful even police force is a bit... Continue Reading →

मानो या न मानो

क्या तुम भगवान में विश्वास करते हो? मैंने एक GenZ लड़के से पूछा, जब मैं उसके साथ ट्रैवल कर रहा था। उसने मुझे कुछ शक से देखा और बस NO कहा। क्या तुम नास्तिक हो? मैंने बातचीत जारी रखने की कोशिश की। तुम ऐसा कह सकते हो, उसने जवाब दिया। तो तुम भगवान में विश्वास... Continue Reading →

Believe It Or Not!

Do you believe in God?I asked a GenZ boy, while travelling with him. He looked with some scepticism at me and just said NO. Are you an atheist? I tried to continue with the conversation. You can say like that, he replied. So you don’t believe in God, but still not fully an atheist. Right?... Continue Reading →

मानो न मानो!

जीवन में सबसे जटिल है सत्य जानते हुए असत्य के संग रहना. सत्य ये भी है कि ब्रह्मांड में स्थित हजारों निहारिकाओं में उपस्थित अरबों ग्रहों के सौर मंडल भी हैं. और इस विशाल रचना में सबसे छोटे तारे हमारे सूर्या का आकर इतना बड़ा है कि उसमें १३ लाख पृथ्वी समा जायें. इस भयंकर... Continue Reading →

नकल में अक्ल नहीं समानता का अधिकार होता है

आज अख़बार में एक रोचक समाचार पढ़ने का सौभाग्य हुआ जहाँ मध्य प्रदेश के सागर संभाग स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक निजी महाविद्यालय के अर्थशास्त्र के छात्रों ने नक़ल का वह उदाहरण प्रस्तुत किया कि बरबस ही होठों पर मुस्कान आ गई और मन प्रफुल्लित हो गया. अनैतिक मूल्यों की पूजा करते इस महाविद्यालय के... Continue Reading →

Old Age Times!

ई.एस.आई. ट्यूबरक्लोसिस हॉस्पिटल - एक अनुभव कितनी उम्र है बाबा?91 बरस!क्या वाक़ई?हां बेटा, 1935 का जन्म है!अरे वह आप तो मेरे पिता जी की उम्र के साथी हैं. स्वच्छ कुर्ता पजामा पहने मास्क लगाये जब यह बाबा जी मेरे क्लिनिक-कक्ष में प्रविष्ट हुए तो सत्तर साल के बुजुर्ग दिख रहे थे परंतु जब उपचार पत्रक... Continue Reading →

भाग्य की कहानी…(656)

बचपन में माँ एक कहानी सुनाया करती थी कि एक राजा था. उसे तीन बेटियां थी और वह मनोरंजन के भाव से रोज अपनी बच्चियों से पूछते थे कि तुम किस के भाग्य से खाना खाती हो. बड़ी बेटी ने बोला, पिताश्री मैं आपके भाग्य से खाती हूँ. मंझली बेटी का उत्तर भी समान था... Continue Reading →

अति डेमोक्रेसी(655)

मैं ये सब लंबे समय से कहता चला आ रहा हूँ पिछले कुछ वर्षों से देश में अति-डेमोक्रेसी याने अति-प्रजातंत्रवादी के नए दौर से गुज़र रहा है जहाँ बिना किसी नैतिक उत्तरदायित्व के आपको कुछ भी कहने की समग्र स्वतंत्रता है. अपशब्दों के प्रयोग के साथ कोई भी किसी भी व्यक्ति को समक्ष में सोशल... Continue Reading →

स्वयं प्रेम में कैसे पड़ें ?

पुरानी कहावत है कि भीतर की यात्रा करना सब से जटिल कार्यों में से एक है यानी अहम ब्रह्मास्मी अर्थात् ब्रह्म का दिव्या स्वरूप आपके अन्तर मन में निहित है और स्वभाव की कमजोरियों की वजह से अन्तर-मन में विराजित प्राकृतिक भगवान की अवधारणा को समझ नहीं पाता है.मुझे प्रतीत होता है कि भीतर की... Continue Reading →

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